Thursday, August 14, 2014

How to Easily Create Tables in Blogger using Microsoft Word


Posted by Editorial Team on 6/05/2013 in Blogger Tutorials

Creating tables is Blogger is something that needs a bit of expertise in HTML and well as in CSS. Sometime you might want your content to be organized systematically into a tabular form aligned properly into rows and columns. Unfortunately, Blogger does not provide you tool or option to create a table for your site. However, Microsoft word has made things a lot flexible that creating a table could never be too stress-free, especially for Blogger. Today, in this article, we will show you How to Create Tables in Blogger using Microsoft Word.


Step#1: Creating a Table in Microsoft Word:

The First thing you need to do is to Download and Install Microsoft Word. If you already have this software installed then, quickly open up Microsoft Word from the start menu. Remember: You can use any version of Microsoft Word. However, in this tutorial the screenshots which we have used, are from MS Office 2010.
After opening the MS Word, the next thing is to create a table. Go to Insert >> Table >> now through the table grid you can select the number of rows and columns, which you want to see in your table. For example, if you want create a 3X3 table then you have to select 3 rows and 3 columns as it can be seen in the following screenshot.
Once the table is ready, you might want to give it a bit of cool and colorful look. Go to the “Design” tab and from there you can either apply the pre-designed styles or .....................................................................................more


Indian Railways

Indian Railways (reporting mark IR / भा. रे) is an Indian state-owned enterprise, owned and operated by the Government of India through the Ministry of Railways. It is one of the world's largest railway networks comprising 115,000 km (71,000 mi) of track over a route of 65,000 km (40,000 mi) and 7,500 stations. In 2011, IR carried over 8,900 million passengers annually or more than 24 million passengers daily (roughly half of which were suburban passengers) and 2.8 million tons of freight daily. In 2011–2012 Indian Railways had revenues of INR1119848.9 million (US$19 billion) which consists of INR696759.7 million (US$12 billion) from freight and INR286455.2 million (US$4.8 billion) from passengers tickets.


Railways were first introduced to India in 1853 from Bombay to Thane. In 1951 the systems were nationalised as one unit, the Indian Railways, becoming one of the largest networks in the world. IR operates both long distance and suburban rail systems on a...................................................................................................more

Vitamin C | विटामिन सी

हम इस ब्लाग मे जो भी जानकारी दे रहे है, वो जानकारी इंटरनेट से निकाली गई है | इस मे हमारी व्यक्तिगत कोई भी लेख नही है |

1.  अन्य नाम

एसकोरबिक ऐसिड (Ascorbic Acid)

2.  क्या करता है
यह आपके शरीर के सबसे छोटे इकाई या सेल (cell) को बांध के रखता है। इससे शरीर के विभिन्न अंग को आकार बनाने में मदद मिलता है। यह शरीर के बल्ड वेस्सल या खून के नसों (रक्त वाहिकाओं, blood vessel) को मजबूत बनाता है। इसके एंटीहिस्टामीन गुणवत्ता के कारण, यह सामान्य सर्दी-जुकाम में दवा का काम कर सकता है।.............................................................................................more

चमकती हुई त्‍वचा के लिये अपनाइये ये 20 टिप्‍स

साफ और दमकती हुई त्वचा अक्सर लड़कियों का ख्वाब होता है। कई लड़कियों की इतनी साफ त्वचा होती है कि अक्सर उन्हें देखने वाले लोग चौंक जाते हैं। आप सोंचते होगें कि उन्हें ये त्वचा विरासत में ही मिली होगी और आप खुद के बारे में सोंच कर उदास हो जाती होगीं। पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैकिसी भी लड़की कि त्वचा चमकदार बन सकती है पर अगर उस पर लगातार ध्यान दिया जाए तो। ऐसे कई स्किन टिप्स हैं जिसे आप अपना कर साफबिना दाग-धब्बो वाली और चमकीली त्वचा पा सकती हैं। टिप्स में डाइट , मॉइस्चराइजिंग और हाइड्रेटिंग आदि शामिल है। कई लड़कियां पार्लर जा कर फेशियल करवा लेती हैं लेकिन अच्छा आहार खाने पर ध्यान नहीं देती। जिस वजह से उन्हें चमकदार त्वचा नहीं मिल पाती। इसी तरह से अगर आप बाजरू समान का प्रयोग करती हैं तो वह कुछ दिनों तक अपना असर दिखाएगी पर फिर उसके बाद सब बेकार हो जाती है। सर्दियों में होठों के लिये प्राकृतिक लिप बाम अच्छा होगा कि अगर चमकदार त्वचा पाना है तो होममेड ब्यूटि प्रोडक्ट लगाइये। आज हम आपको बताएंगे ऐसे 20 तरीके जिससे आप चमकदार और दाग धब्बे रहित त्व्चा पा सकेंगी। आइये जानते हैं इनके बारे में-

खूब सारा पानी पीजिये

खूब सारा पानी पीजिये और अंदर से तरोताजा रहिये। इसेस शरीर से गंदगी बाहर निकलती है और बॉडी में नए सेल्‍स बनते हैं।..............................................................................................more

ब्यूटी के लिए, बस पांच मिनट - घरेलू सौंदर्य प्रसाधन

 शहद का लेप चेहरे और गले पर करें। जब यह सूखकर कुछ चिपचिपा हो जाए तो उंगलियों के पोरों से चेहरे की मसाज करें। पूरी तरह सूख जाने पर गरम पानी से साफ करके ठंडे पानी से धो लें। इससे त्वचा में कसाव आएगा व चमकदार बनेगी। त्वचा के रूखेपन और अधिक तैलीयपन से भी आपको यह निजात दिलाएगा।

* दो चम्मच सोयाबीन का आटा, एक बड़ा चम्मच दही व शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं तथा इस मिश्रण को कुछ देर चेहरे पर लगाकर चेहरा धो लें। इससे त्वचा में कसावट आती है।

* बादाम, गुलाब के फूल, चिरौंजी और पिसा जायफल रात को दूध में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर इसका उबटन लगाएं। इससे चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं और त्वचा कांतिमय बनती है।....................................................................................................................more

Monday, August 4, 2014

ऋतु चोपड़ा की पेंटिंग्स अभिव्यक्ति के स्तर पर कहीं कहीं इंस्टालेशन का-सा आभास देती हैं


ऋतु चोपड़ा की पेंटिंग्स की 'कहे कबीर' शीर्षक से नई दिल्ली की अपर्णा कौर एकेडमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स एण्ड लिटरेचर की कला दीर्घा में 20 अक्टूबर से आयोजित हो रही एकल प्रदर्शनी ने एक फिर कबीर की प्रासंगिकता की जड़ों के गहरे तक धंसे / जमे होने को प्रकट किया है | उल्लेखनीय है कि कबीर की रचनाएँ काव्यत्व और कथ्य की दृष्टि से तो चुनौतीपूर्ण रही ही हैं, उनकी रचनाओं को किसी भी अन्य माध्यम में ट्रांसलेट करना तो और भी अधिक चुनौतीभरा रहा है | इसके बावजूद, विभिन्न माध्यमों के प्रख्यात लोगों ने कबीर की रचनाओं को अपने-अपने तरीके से देखने / परखने और संयोजित करने के प्रयास किए हैं | यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि रवींद्रनाथ टैगोर, लिंडा हेस, निनेल गफुरोवा, अली सरदार जाफ़री आदि ने कबीर के पदों को चुन चुन कर अपनी-अपनी भाषाओं में अनुदित किया है और कुमार गंधर्व जैसे महान गायक ने अपने तड़प भरे, आहाल्दक और प्राण उड़ेलने वाले स्वर में उन्हें गाया है | इसका कारण कबीर के संतत्व की विरलता की बजाए उनके कवित्व की विरलता में खोजा / पाया गया है | कबीर की इसी सृजन-शक्ति ने उन्हें वर्तमान में भी प्रासंगिक बनाए रखने में सर्वाधिक भूमिका निभाई है |
युवा चित्रकार ऋतु चोपड़ा द्वारा उनकी रचनाओं के संदर्भों पर आधारित पेंटिंग्स बनाना और प्रदर्शित करना उनकी प्रासंगिकता के बने रहने का ही एक उदाहरण है | वास्तव में कबीर के कवित्व ने ही उनके दर्शन को सर्वाधिक लोक-व्याप्ति और लोक-दृष्टि दी, जिसके चलते वह आज भी प्रासंगिक और चुनौती बने हुए हैं | अलौकिक, अमूर्त वस्तु को लौकिक, मूर्त वस्तु में बदलने की अप्रतिम क्षमता कबीर में थी और कविता के लिए यह सबसे अधिक आवश्यक भी है, क्योंकि स्वयं कविता लौकिक या ऐहिक वस्तु है | ऐहिक होकर ही वह ऐसी 'आँख' बनती है जो अपनी मर्मबेधिता से आर-पार देखती है और अपने छोटे से पटल पार वे सारे दृश्य अंकित करती है जो पाठक की आँख में परावर्तित होते हैं | पारदर्शिता आखिर कहते किसे हैं - जो प्रकाश के पीछे छिपे अँधेरे को या अँधेरे के पीछे छिपे प्रकाश को देख या दिखा सकती है | कबीर की रचनाओं को प्रासंगिक बनाए रखने में वास्तव में कबीर की मानवीय व जटिल द्वंद्वपूर्ण रचना-प्रक्रिया या बुनावट का है जो उनके काव्य में साँस की तरह चलती तो है, पर दिखाई नहीं देती   है | क्योंकि यह कविता ही नहीं उनका जीवन भी है जो एक जटिल बुनावट की कहानी है |
ऋतु चोपड़ा का कबीर से परिचय हालाँकि आबिदा परवीन की आवाज़ के ज़रिये हुआ; आबिदा परवीन की आवाज़ के जादू से प्रभावित होकर उन्होंने कबीर की साखी सुनना शुरू किया तो फिर कबीर उनकी आत्मा और उनकी सोच में रचते-बसते चले गये | कबीर का आत्मा और सोच में रचना-बसना उनके केनवस पर ट्रांसफर हुआ तो उनकी पेंटिग्स एक दर्शक के रूप में हमें व्यक्तिगत आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करती हुई लगती हैं | कबीर की रचनाओं से प्रेरणा पाकर बनी-रची ऋतु की पेंटिंग्स देखते हुए हम ख़ुद को अपने अंदर देखते हुए पाते   हैं | कबीर की रचनाओं के प्रभावों और / या अर्थों को विविधतापूर्ण प्रतिरूप रचते हुए ऋतु चाक्षुक बिम्ब की भाषा में ढालती हैं | ऋतु की पेंटिंग्स में प्रकट होने वाली आकृतियाँ और वह परिदृश्य जिसमें वे स्थित हैं, किसी पूर्वस्मृति की आभा से दीप्त लगती हैं | पेंटिंग्स के फ्रेम में जो कहा गया बताया गया है या लगता है, कई बार हम अपने आप को उस फ्रेम से बाहर जाते हुए भी पाते हैं | ऋतु भले ही यह कह रहीं हों कि फलाँ पेंटिंग कबीर के फलाँ दोहे या साखी पर आधारित है, पर उनकी पेंटिंग में कबीर की सारी सोच और उनका सारा दर्शन प्रतिध्वनित हो रहा होता है | शायद यही कारण है कि ऋतु की पेंटिंग्स अभिव्यक्ति के स्तर पर कहीं कहीं इंस्टालेशन का-सा आभास देती हैं | उनकी पेंटिंग्स में - दूसरी, तीसरी, चौथी ....बार देखे जाने पर अनुभव स्थानांतरित होते जाते हैं, बदलते जाते हैं और वह जैसे एक फ्रेम में होने के बावजूद स्पेस में होने का आभास देते हैं |
ऋतु चोपड़ा को कला का संस्कार उज्जैन में   मिला | कला की उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं प्राप्त की है, लेकिन कला के प्रति अपनी अभिरुचि को देखते हुए जब उन्हें लगा कि उन्हें कला के तकनीकी पक्ष से भी परिचित होना चाहिए तो कला की प्राथमिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए उन्होंने कला शिक्षक और कलाकार चंद्रशेखर काले से मार्गदर्शन प्राप्त   किया | इस बीच लिंडा हेस की पुस्तक 'सिंगिंग एम्प्टीनेस' उन्होंने पढ़ी, जिसने ऋतु को स्व से परिचित कराया | लिंडा हेस ने भारत के संत काव्य का विषद अध्ययन किया है और उनके उस विषद अध्ययन को देख / जान कर ऋतु ने जीवन और समाज को आध्यात्मिक नज़रिए से देखना / पहचानना शुरू किया | यह आध्यात्मिक नजरिया कब उनकी पेंटिंग्स में आ पहुँचा, और पेंटिंग्स में अभिव्यक्त होने वाले विषयों, विवरणों, रूपों व रंगों को निर्देशित व नियंत्रित करने लगा, यह ख़ुद उन्हें भी पता नहीं चला | उनके आध्यात्मिक नज़रिए में जो मानवीय पक्ष रहा, वह उन्हें कबीर के पास ले आया | कबीर के दोहे व साखियाँ वह प्रतिदिन रेडियो पर सुबह सुनती ही थीं | ऋतु की पेंटिंग्स के विषय अध्यात्म से जुड़े तो थे ही: लिहाजा धीरे-धीरे कबीर की रचनाओं ने उनके केनवस पर जगह बना ली | 1966 में जन्मी और उज्जैन जैसे कला व अध्यात्म से परिपूर्ण शहर में पली-बढीं ऋतु ने उज्जैन के अलावा देवास, इंदौर, जबलपुर, पुणे, मुंबई, नोएडा आदि में आयोजित समूह प्रदर्शनियों में अपने काम को प्रदर्शित किया है | वह उज्जैन और दिल्ली में अपनी पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनियाँ भी कर चुकीं हैं | इसी वर्ष मई व जुलाई के बीच अमेरिका के सनफ्रांसिस्को में आयोजित हुई एक बड़ी समूह प्रदर्शनी में भी उनकी पेंटिंग्स प्रदर्शित हुईं |
ऋतु चोपड़ा की अपर्णा कौर एकेडमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स एण्ड लिटरेचर की कला दीर्घा में 20 अक्टूबर से आयोजित हो रही तीसरी एकल प्रदर्शनी उनकी कला-यात्रा के नए आयामों से परिचित होने का मौका तो हमें देगी ही, कबीर की रचनात्मक प्रासंगिकता का एक और उदाहरण व सुबूत भी प्रस्तुत करेगी |
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Friday, August 1, 2014

Post of Love SmS

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